अभिमन्यु विश्वकर्मा की रिपोर्ट
संप्रेषणा नाट्य मंच,कटनी नाट्य गृह में नाटक”अब मैं जानी देह बुढ़ानी का हुआ सफल मंचन।
संगीत नाटक अकादमी,नई दिल्ली के सहयोग से संप्रेषणा नाट्य मंच कटनी के कलाकारों ने रविवार की शाम 7:00 बजे ऑर्डनेंस फैक्ट्री स्थित नाट्य गृह में जयवंत दलवी रचित संध्या छाया से प्रेरित नाटक अब मैं जानी देह बुढ़ानी का शानदार मंचन किया। जिसमें एक बुजुर्ग दंपत्ति की जीवन यात्रा है अपने पूरे जीवन काल में अपने बच्चों के लिए अपना सर्वस्व लुटाने वाले दंपत्ति अपने अंतिम समय में किस प्रकार से अपने बच्चों के वियोग में अंतिम सांस गिनते है जिसने दर्शकों को दीर्घकालिक युग के यात्रा सूत्र में बांध दिया। कलाकारों का बेहतरीन अभिनय,सुंदर संगीत संयोजन, एक घर की मंच सज्जा एवं निर्देशक की पारखी परिकल्पना से दर्शक दीर्घा रोमांचित एवं गंभीर हो उठी।
नाटक को मंच पर उकेरने वाले कलाकार रहे के. एल. राय ,पूजा सेन,आकाश तिवारी,शिवम रजक,सतीश अहिरवार,प्रियांशु श्रीवास्तव,खुशी शाक्या, आदित्य गोस्वामी,शिवानी अहिरवार,आशुतोष गुप्ता, नंदिनी गुप्ता आदि।दृश्यों के अनुरूप संगीत का सुंदर प्रयोग प्रसारित किया। मंच के अनुरूप सटीक प्रकाश की परिकल्पना और संचालन सतीश अहिरवार ने किया। नाटक में प्रयुक्त सुंदर गीतों की रचना,मंच परिकल्पना एवं सधा हुआ निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,नई दिल्ली से स्नातक द्वारिका दाहिया ने किया।नाटक का अवलोकन करने कला पारखियों,रंगकर्मिर्यो सहित बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।