कटनी पुलिस की धारा 185 की कार्यवाही आम नागरिकों के लिए बनी बड़ा सवाल

कटनी।
कटनी जिले में पुलिस द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 (नशे में वाहन चलाना) के तहत की जा रही कार्यवाही अब आम नागरिकों के बीच कई सवाल खड़े कर रही है। खासतौर पर यह कार्यवाही उन्हीं क्षेत्रों में की जा रही है, जहाँ खुलेआम शराब के ठेके संचालित हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शराब पीना कानूनन अपराध माना जाता है, तो फिर प्रशासन द्वारा शराब की बिक्री पर सख्ती क्यों नहीं की जा रही। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब शराब ठेके प्रशासन की अनुमति से चल रहे हैं, तो ठेके से शराब पीकर घर लौट रहे लोगों को ही धारा 185 के तहत दंडित करना कितना न्यायसंगत है।
आरोप है कि कटनी क्षेत्र में कुछ पुलिसकर्मी एवं एनआरएस (NRS) से जुड़े कर्मचारी शराब पीकर घर जा रहे लोगों के वाहनों को रोककर उनकी चाबियाँ जब्त कर लेते हैं और उन्हें मजबूरी में धारा 185 के तहत मामला दर्ज करवाने के लिए विवश किया जाता है। नागरिकों का कहना है कि संबंधित एनआरएस कर्मियों को शासन द्वारा कोई नियमित वेतन नहीं दिया जाता, फिर भी वे आम लोगों के वाहनों को रोकने और कार्यवाही करने में सक्रिय नजर आते हैं।
यह भी चर्चा का विषय है कि क्या मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह शराब ठेकों के आसपास ही धारा 185 की कार्यवाही की जा रही है, या फिर कटनी में ही यह व्यवस्था सख्ती के नाम पर असंतुलित रूप से लागू की जा रही है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन स्पष्ट करे कि—
यदि शराब पीना अपराध है, तो उसकी बिक्री पर रोक क्यों नहीं?
धारा 185 की कार्यवाही के स्पष्ट दिशा-निर्देश क्या हैं?
वाहन चालकों की चाबी जब्त करना किस नियम के तहत किया जा रहा है?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक कटनी पुलिस की धारा 185 की कार्यवाही आम नागरिकों के बीच संदेह और असंतोष का कारण बनी रहेगी।
कटनी शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र की हर छोटी बड़ी खबरें एवं विज्ञानपन के लिये सम्पर्क करे संवाददाता हेमन्त सिंह 9425829327














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